मंगलवार, 8 मार्च 2016

बुजुर्गों की दूरदृष्टि

एक बहुत बड़ा विशाल पेड़ था। उस पर बहुत से हंस रहते थे। उनमें एक बहुत सयाना हंस था। वह बुद्धिमान और बहुत दूरदर्शी था। सब उसका आदर करते 'ताऊ' कहकर बुलाते थे। एक दिन उसने एक नन्ही-सी बेल को पेड़ के तने पर बहुत नीचे लिपटते पाया। ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर कहा, "देखो, इस बेल को नष्ट कर दो। एक दिन यह बेल हम सबको मौत के मुँह में ले जाएगी।".

एक युवा हंस हँसते हुए बोला, "ताऊ, यह छोटी-सी बेल हमें कैसे मौत के मुँह में ले जाएगी?"

सयाने हंस ने समझाया, "आज यह तुम्हें छोटी-सी लग रही हैं। धीरे-धीरे यह पेड़ के सारे तने को लपेटा मारकर ऊपर तक आएगी। फिर बेल का तना मोटा होने लगेगा और पेड़ से चिपक जाएगा, तब नीचे सेऊपर तक पेड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी बन जाएगी। कोई भी शिकारी सीढ़ी के सहारे चढ़कर हम तक पहुंच जाएगा और हम मारे जाएँगे।"

दूसरे हंस को यक़ीन न आया, "एक छोटी सी बेल कैसे सीढ़ी बन जाएगी?"

तीसरा हंस बोला, "ताऊ, तू तो एक छोटी-सी बेल को खींच कर ज्यादा ही लम्बा कर रहा है।" किसी ने कहा, "यह ताऊ अपनी अक्ल का रोब डालने के लिए अर्थहीन कहानी गढ़ रहा है।"

इस प्रकार किसी भी हंस ने ताऊ की बात को गंभीरता से नहीं लिया। इतनी दूर तक देख पाने की उनमें अक्ल कहां थी! समय बीतता रहा। बेल लिपटते-लिपटते ऊपर शाखों तक पहुंच गई। बेल कातना मोटा होना शुरु हुआ और सचमुच ही पेड़ के तने पर सीढ़ी बन गई जिस पर आसानी से चढ़ा जा सकता था।

सबको ताऊ की बात की सच्चाई नजर आने लगी पर अब कुछ नहीं किया जा सकता था क्योंकि बेल इतनी मजबूत हो गई थी कि उसे नष्ट करना हंसों के बस की बात नहीं थी। एक दिन जब सब हंस दाना चुगने बाहर गए हुए थे तब एक बहेलिआ उधर आ निकला।

पेड़ पर बनी सीढ़ी को देखते ही उसने पेड़ पर चढकर जाल बिछाया और चला गया। साँझ को सारे हंस लौट आए पेड़ पर उतरे तो बहेलिए के जाल में बुरी तरह फंस गए। जब वे जाल में फंस गए और फड़फड़ाने लगे तब उन्हें ताऊ की बुद्धिमानी और दूरदर्शिता का पता लगा। सब ताऊ की बात न मानने के लिए लज्जित थे और अपने आपको कोस रहे थे। ताऊ सबसे रुष्ट था और चुप बैठा था।

एक हंस ने हिम्मत करके कहा, "ताऊ, हम मूर्ख हैं लेकिन अब हमसे मुँह मत फेरो।'

दूसरा हंस बोला, "इस संकट से निकालने की तरकीब तू ही हमें बता सकता हैं। आगे हम तेरी कोई बात नहीं टालेंगे।"

सभी हंसों ने हामी भरी तब ताऊ ने उन्हें बताया, "मेरी बात ध्यान से सुनो। सुबह जब बहेलिया आएगा, तब मुर्दा होने का नाटक करना। बहेलिया तुम्हें मुर्दा समझकर जाल से निकाल कर जमीन पर रखता जाएगा। वहां भी मरे समान पड़े रहना जैसे ही वह अन्तिम हंस को नीचे रखेगा, मैं सीटी बजाऊंगा। मेरी सीटी सुनते ही सब उड़ जाना।"

सुबह बहेलिया आया। हंसो ने वैसा ही किया, जैसा ताऊ ने समझाया था। सचमुच बहेलिया हंसों को मुर्दा समझकर जमीन पर पटकता गया। सीटी की आवाज के साथ ही सारे हंस उड़ गए। बहेलिया अवाक् होकर देखता रह गया।

बुजुर्गों की सोच दूरदृष्टि और अनुभव वाली होती है उनके कहे का अनुसरण हमको भविष्य की समस्याओं से सुरक्षित रखता है।

16 टिप्‍पणियां:

  1. शिक्षाप्रद व अनुसरण योग्य कहानी

    उत्तर देंहटाएं
  2. शिक्षाप्रद व अनुसरण योग्य कहानी

    उत्तर देंहटाएं
  3. "" बुजुर्ग परिवार में रिढ की हड्डी के समान होते हैं ""

    उत्तर देंहटाएं
  4. " नन्हे पौधों को तीखी धूप से बूढ़े शजरों की छाँव बचाती है
    तो फिर क्यों लोग आखिर बुर्जगों से अब अलग रहा करते हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. चलो एक ऐसा विश्व बनायें जहां अहिंसा का हो संगीत
    प्रेम चांदनी बरसाये चांद, सूरज गाये प्यार के गीत
    खिले फूल मानवता के हर दिल की बगिया में
    न उगे नफरतों के शूल कहीं भी इस दुनिया में
    दिये जलें हर देश मे समता और विश्वास के
    आंतकवाद और हिंसा के समूल विनाश के
    अंधकार पर हो प्रकाश की अदभुत और अतुलनीय जीत
    चलो एक ऐसा विश्व बनायें जहां अहिंसा का हो संगीत
    प्रेम चांदनी बरसाये चांद, सूरज गाये प्यार के गीत।
    कब्रों में हो जायें दफ़्न युद्ध और तनाव की बातें
    गले मिलें एक दूजे से सब धर्मों की सच्ची बातें
    सदभाव की किरणों से चमक उठे सारा संसार
    जाति-नस्ल के भेद न हो, मन मे बसा हो सबके प्यार
    एक-दूजे को देखकर न कभी भी इंसान हो भयभीत
    चलो एक ऐसा विश्व बनायें जहां अहिंसा का हो संगीत
    रौशनी ही रौशनी हो शांति की जले मशाल
    बंधुत्व की भावना का जीवन बने एक मिसाल
    लोगों के अंदर लें आकार गांधी,नानक और कबीर
    सूफ़ी संतो की वाणी की चले यहां मस्त समीर
    लोगों के अंदर लें आकार गांधी,नानक और कबीर
    अम्बर, धरती, सागर सब उमंगों के गायें गीत
    - विजय "गुन्जन"

    उत्तर देंहटाएं
  6. बुजुर्ग घर का वह वृक्ष है, जिसकी छॉह मे परिवार के सभी सदस्य निश्चिंत रहतें हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बुजुर्ग घर का वह वृक्ष है, जिसकी छॉह मे परिवार के सभी सदस्य निश्चिंत रहतें हैं।

    उत्तर देंहटाएं