शनिवार, 24 दिसंबर 2016

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 56) 24 Dec

🌹 कला और उसका सदुपयोग

🔴 83. धर्म-प्रचार की पद-यात्रा— घरेलू कार्यों से छुट्टी लेकर कुछ विचारशील लोग टोली बनाकर पद-यात्रा पर निकला करें। पूर्व निश्चित प्रोग्राम पर एक-एक दिन ठहरते हुए आगे बढ़ें। प्रातः जप, हवन, तीसरे पहर विचार-गोष्ठी और रात्रि को सामूहिक प्रवचनों का कार्यक्रम रहा करे। जिन जगहों में टोली को ठहरना हो, वहां पहले से ही आवश्यक तैयारी रहे, ऐसा प्रबन्ध कर लेना चाहिए। सन्त बिनोवा की भूदान जैसी पद-यात्राएं युग-निर्माण योजना के प्रसार के लिए भी समय-समय पर की जाती रहनी चाहिए।

🔵 प्रसन्नता की बात है कि इस वर्ष बहरायच जिसे में श्री गिरीश देव वर्मा के नेतृत्व में एक महीने की पद-यात्रा का कार्यक्रम संभ्रान्त एवं सुशिक्षित लोगों ने बनाया है। टोली की योजना तथा कार्य-पद्धति का विवरण पाठक अन्यत्र पढ़ेंगे।

🔴 84. आदर्श वाक्यों का लेखन— दीवारों पर आदर्श वाक्यों का लेखन एक सस्ता लोक शिक्षण है, गेरू में गोंद पकाकर दीवारों पर अच्छे अक्षरों में आदर्श शिक्षात्मक एवं प्रेरणाप्रद वाक्य लिखे जाएं तो उनसे पढ़ने वालों पर प्रभाव पढ़ता है। जिस जगह प्रेरणाप्रद विचार पढ़ने को मिलें तो उस स्थान के सम्बन्ध में स्वतः ही अच्छी भावना बनती है। जहां स्याही का ठीक प्रबन्ध न हो सके तो सूखे गेरू की डली से भी लिखते रहने का कार्यक्रम चलता रहा सकता है। कई व्यक्ति मिल कर अपने नगर की दीवारों पर इस प्रकार लिख डालने का कार्यक्रम बनालें तो जल्दी ही नगर की सारी दीवारें प्रेरणाप्रद बन सकती हैं।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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