बुधवार, 11 जनवरी 2017

👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 14) 11 Jan

🌹 कठिनाइयों से डरिये मत, जूझिये

🔵 इन चिन्ताओं के कारण उत्पन्न हुए विक्षेपों का कारण क्या है? जीवन के प्रति, सुलझे हुए दृष्टिकोण का अभाव। जीवन के प्रति यदि सहज दृष्टिकोण अपनाकर चला जायेगा, अनुकूलताओं और प्रतिकूलताओं को दिन और रात की तरह स्वाभाविक समझा जायेगा तो कोई कारण नहीं है कि प्रगति पथ अवरुद्ध हो जाय। दृष्टिकोण इच्छाओं— आकांक्षाओं के सम्बन्ध में किसी विचारक का कथन है आप जैसे है वैसे ही आपकी दुनिया है। सृष्टि की प्रत्येक वस्तु आपके अभ्यन्तर की छाया है। बाहर जो कुछ है वह गौण है क्योंकि वह सब आपकी मनःस्थिति का ही प्रतिबिम्ब है। महत्वपूर्ण तो यह है कि आप भीतर से क्या है? भीतर से आप जो कुछ भी हैं उसी के अनुरूप आपकी दुनिया ढल जायेगी। जो कुछ आप जानते हैं, अनुभव द्वारा प्राप्त हुआ है और जो कुछ आप भविष्य में जान सकेंगे वह भी आपके अनुभव द्वारा ही प्राप्त होगा तथा आपके व्यक्तित्व का अविच्छिन्न अंग बन जायेगा’’

🔴 इसमें कोई सन्देह नहीं है कि जीवन और जगत के प्रति मनुष्य की अपनी दृष्टि ही उसकी दुनिया का निर्माण करती है। इसीलिये परिस्थितियां उतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं जितनी कि मनःस्थिति। इसीलिए सौन्दर्य, हर्ष और उल्लास अथवा दुःख और विषाद और पीड़ा का अनुभव मनुष्य बाहरी कारणों से अनुभव करता है। अस्तु, प्रस्तुत प्रतिकूलताओं का समाधान करने के लिए स्थिर चित्त से तन्मय होता तो उपयुक्त है किन्तु इसके लिए चिन्तित होने, निराश हो जाने से कोई बात नहीं बनती। चिन्ता और निराशा तो समाधान के मार्ग में व्यवधान उत्पन्न करती हैं। प्रतिकूलताओं को देखकर घबड़ाना और उनके लिए चिन्तित होते रहना व्यर्थ ही नहीं हानिकारक भी है।

🔵 ‘‘मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है’’ इस सिद्धान्त को यदि जीवन का मूल मन्त्र बना लिया जाय तो इसमें सन्देह नहीं कि पुरुषार्थ परायण होकर अभीष्ट प्रकार की सफलता सम्पादित की जा सकती है। कहते हैं मनुष्य का भाग्य उसके हाथ एवं मस्तक की रेखाओं पर लिखा होता है। तार्किक बुद्धि इस बात को स्वीकार करती है पर थोड़ी गहराई में चलें तथा उक्त कथन का गम्भीरता से विश्लेषण करें तो यही तथ्य निकलता है कि मनुष्य को हाथ अर्थात् पुरुषार्थ का प्रतीक तथा मस्तिष्क अर्थात् बुद्धिरूपी दो ऐसी सम्पदाएं प्राप्त हैं जिनका भली भांति सदुपयोग करके मन चाही दिशा में सफलताएं अर्जित की जा सकती है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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